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  • माँ की छाती में दर्द xxx sex story

    indian sex kahani हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी के चाहने वालों के लिए जो यह घटना लेकर आया हूँ, मेरे जीवन का एक बड़ा ही शानदार और मज़ेदार अनुभव है और यह उस समय की बात है जब मेरी उम्र 18 साल थी, मेरे बदन में जवानी का असर दिखने लगा था और में औरतों और लड़कियों में बहुत रूचि दिखाने लगा था। दोस्तों मेरी माँ बहुत प्यार से मेरा ध्यान रखती थी और में हमेशा उनके पास रहना पसंद करता था, मेरी माँ बहुत ही हॉट सेक्सी और सुंदर है। उनके जिस्म का क्या मस्त आकार था? वो एकदम गोरी उनके लंबे काले बाल और उनके बूब्स का आकार करीब 38-26-38 था। दोस्तों मैंने कई बार मेरी माँ और पिताजी को चुदाई करते हुए भी देखा था। उस समय माँ और पिताजी को एकदम नंगे देखा है और कभी तो मेरी माँ के बूब्स को पिताजी किसी छोटे बच्चे की तरह चूसते थे और कभी तो मेरी माँ भी मेरे पिताजी का लंड चूस लिया करती थी। फिर पिताजी मम्मी के ऊपर लेट जाते और पिताजी अपना लंड माँ की चूत में डालकर धक्के देने लगते और माँ के मुहं से हल्की सी सिसकी निकलती और फिर पिताजी ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगते। अब माँ भी नीचे से अपने कूल्हों को उठाकर मज़ा लेती थी और फिर कुछ देर बाद वो दोनों शांत भी हो जाते और इधर यह सब देखकर मेरा भी बुरा हाल हो जाता था।

    दोस्तों क्योंकि में भी उसी कमरे में सोता था और वो दोनों सोचते थे कि में सो रहा हूँ, लेकिन में उनकी चुदाई देखने के लिए अपनी दोनों आँखों को बंद करके सोने का नाटक करता और जब उनका खेल शुरू हो जाता तो में चोरीछिपे देखा करता था। दोस्तों जब कभी काम करते समय मेरी माँ उनका आँचल उनकी छाती से फिसलकर नीचे गिरता या वो नीचे झुकती में उनके बूब्स की एक झलक पाने के कोशिश करता, मेरी माँ को इस बात का पता था और वो जानबूझ कर मुझे अपने बूब्स का जलवा दिखा देती थी। फिर बहुत सालों बाद मेरी माँ को एक बच्चा हुआ, जिसकी वजह से माँ उस समय आराम में थी और में अपनी माँ को घर के काम में भी मदद कर देता था, जिसकी वजह से वो खुश रहती थी और कुछ दिनों के बाद माँ ठीक हो गयी। दोस्तों यह घटना तब हुई जब मेरे पिताजी उनके किसी काम की वजह से बाहर चले गए। वो सुबह दस बजे की ट्रेन से चले गये। फिर उसी दिन शाम को बच्चे की तबीयत कुछ खराब हो गयी, जिसकी वजह से उसने दूध पीना भी बंद कर दिया और अब माँ के निप्पल से दूध ना निकलने से वो भारी हो गयी। अगले दिन डॉक्टर को दिखाया और उसने कहा कि बच्चा अगर दूध नहीं पीता है तो आपको पंप से छाती का दूध बाहर निकालना पड़ेगा और उस समय में भी माँ के साथ डॉक्टर के पास गया था।

    फिर में उस दिन घर ही था, में अपनी पढ़ाई कर रहा था और कुछ देर बाद मैंने देखा कि माँ की छाती में दोबारा दर्द होने लगा था और वो अपने बूब्स को दबाए जा रही थी। फिर मुझे अचानक ही डॉक्टर की वो बात याद आ गई और मैंने माँ से कहा कि डॉक्टर ने कहा था कि छाती में दूध जमा होने की वजह से आपको तकलीफ़ होगी, हम ऐसा करते है कि में आपके बूब्स को दबाकर दूध निकाल देता हूँ, क्योंकि आज तो में भी पंप नहीं लेकर आया हूँ और मैंने पूछा क्यों माँ ठीक है ना? अब वो कहने लगी कि तुम जैसे भी कुछ भी करो, लेकिन मुझे इस दर्द से छुटकारा दिलाओ, मुझे बड़ा तेज दर्द हो रहा है। अब माँ ने यह कहते हुए ब्लाउज का एक बटन खोला और तुरंत ही उनका एक बड़े आकार का बूब्स बाहर निकाल आया। फिर मैंने निप्पल को दबाया, जिसकी वजह से उन्हे दर्द हुआ और वो कहने लगी कि ऐसे मुझे दर्द हो रहा है। अब में उनको कहने लगा कि इसके अलावा भी मेरे पास एक और तरीका है, आप कहे तो में छोटे बच्चे की तरह आज आपका दूध चूसकर पी लेता हूँ? तभी वो कहने लगी कि चल तू इतना बड़ा हो गया है और यह सब करेगा। अब में उनको बोला कि क्यों क्या हुआ, में भी तो आपका बेटा हूँ।

    दोस्तों उन्हे बहुत ही ज़ोर का दर्द हो रहा था, इसलिए वो कहने लगी कि हाँ ठीक है, लेकिन तुम जल्दी करो। फिर में खुश होकर उनको बोला कि में अभी चूसकर आपके बूब्स को खाली कर देता हूँ और मैंने उनके निप्पल को अपने होंठो पर लगाया और निप्पल को मुहं में लेकर चूसना शुरू किया, जिसकी वजह से अब मेरे मुहं में दूध आने लगा और फिर में चूस चूसकर पीने लगा। दोस्तों लगातार चूसने की वजह से मेरे मुहं में दूध भर गया था और मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और फिर मैंने माँ से पूछा क्यों में दूध पीना भूला तो नहीं? माँ हंसकर बोली कि माँ का दूध कोई बेटा नहीं भूल सकता और में अब बूब्स को दबा दबाकर दूध पीने लगा था, जिसकी वजह से माँ को बड़ा आराम मिलने लगा था। फिर कुछ देर में मैंने बूब्स का पूरा दूध पी लिया, जिसकी वजह से मेरी माँ की छाती हल्की हो गयी और उनका वो दर्द भी दूर हो गया। अब वो मुझसे कहने लगी कि बेटा आज तूने मेरी बहुत मदद की है आज तो में इस दर्द से मर ही जाती और तूने मुझे बचा लिया। फिर मैंने कहा कि माँ कोई बात नहीं है अब तुम्हे इस वजह से तकलीफ़ नहीं होगी, बच्चा जब तक दूध नहीं पीने लगता तब तक में पी लूँगा। अब माँ बोली कि हाँ यह बात हम दोनों किसी को नहीं बताएँगे। तुम यह बात पिताजी को भी मत बताना।

    फिर मैंने बोला कि हाँ पक्का में किसी को भी नहीं बताऊंगा, सिर्फ़ हम दोनों के बीच में ही रहेगी और रात को में ट्यूशन से घर लौटा, खाना खाया। अब माँ मुझसे कहने लगी कि आज तो तेरे पिताजी घर में नहीं है तू मेरे पास ही सो जाना और मैंने हाँ कह दिया। में मन ही मन बहुत खुश था और फिर रात को जब हम दोनों सोने लगे तभी माँ मुझसे बोली कि बेटा दो तीन दिनों की बात है तुम्हे तकलीफ़ उठानी होगी और मेरा दूध पीना होगा। अब में उनको बोला कि माँ इसमे तकलीफ़ की क्या बात है? फिर रात को भी में माँ के पास में लेटकर उनका दूध पीने लगा था और में उनके बूब्स को सहलाता भी जा रहा था। दोस्तों मुझे तो मानो स्वर्ग मिल गया था, मुझे वाह क्या मस्ती आ रही थी। मैंने एक एक करके दोनों बूब्स का दूध पिया और दूध पीते समय में अपना हाथ उनकी कमर पर ले जाता और एक बार तो मैंने उनके कूल्हों पर भी अपने हाथ को रख दिया और ज़ोर से दबा भी दिया, लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने तभी देखा कि माँ अपनी चूत पर साड़ी के ऊपर से ही ज़ोर से हाथ फेर रही थी और फिर वो पेटीकोट के अंदर हाथ डालकर चूत को खुजाने लगी।

    अब में तुरंत समझ गया कि माँ गरम हो गयी है और में अब उनको ज्यादा गरम करके जोश में लाने के लिए बूब्स को चूसते हुए उनके पेट के नीचे तक अपने एक हाथ को ले गया और फिर अपना एक पैर उनकी जाँघो के ऊपर रख दिया। फिर उसी समय माँ कहने लगी कि हाँ अब तू रहने दे मुझे आराम मिल गया और उसी समय मैंने हंसकर कहा कि तेरा मतलब पूरा होते ही मुझे दूर हटा दिया। अब माँ मुस्कुराते हुए बोली कि चल बदमाश कहीं का, अभी तो तुझे कई बार मेरा दूध ऐसे ही पीना है। दोस्तों उस रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, इसलिए में माँ की जांघ के ऊपर अपने पैर को रखकर लेट गया, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली। फिर उनको कुछ देर बाद नींद आ गयी और मैंने उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और उसी समय गहरी नींद में होने की वजह से वो मुझसे लिपट गयी और मुझे तो बड़ा मज़ा आ रहा था। अब मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी। फिर कुछ देर बाद वो घूमकर सो गयी और मैंने अपने लंड को उनके दोनों कूल्हों की दरार में सटा दिया, जिसकी वजह से मुझे तो अब बहुत मज़ा आने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर तक उठा दिया और अब अपने लंड को उनकी गांड से सटाते हुए में उनसे चिपककर सोने का नाटक करने लगा था।

    फिर थोड़ी देर के बाद माँ ने करवट ली, शायद उनकी नींद खुली होगी, उन्होंने अपनी साड़ी को थोड़ा सा नीचे किया और वो सीधी लेट गयी और कुछ देर के बाद में उनके ऊपर अपने पैर और हाथ रखकर लिपटकर सो गया। दोस्तों उस रात को और कुछ भी नहीं हुआ, लेकिन मेरी इच्छा थी कि में एक बार उनकी चूत को देखूं और सेक्स का भी मज़ा लूँ और इस तरह फिर सुबह हो गयी। अब में उठकर तैयार होकर खा पीकर अपने कॉलेज चला गया, दोपहर को में अपने घर था और दोपहर के समय मैंने उनका दूध पिया और बीच में मैंने बूब्स को ज़ोर से दबाकर दाँत भी गड़ाए। अब वो दर्द की वजह से चीख मारकर कहने लगी कि यह क्या करता है क्या दूध ऐसे पिया जाता है? और कुछ देर बाद उसने मुझे अपने से दूर हटा दिया। फिर में शाम को ट्यूशन चला गया और रात तक वापस आ गया, तब तक माँ ने खाना बना लिया था और हम दोनों ने साथ में खाना खाया। दोस्तों उस दिन वो मेरे ऊपर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी और वो बार बार किसी ना किसी बहाने से मुझे अपने बूब्स का जलवा दिखा रही थी और खाने के बाद माँ ने मुझे फल खाने को दिया। फिर वो एक आम को चाकू से काटने लगी और में उनको कहने लगा कि में तो इसको ऐसे ही चूसकर खा लूँगा, मुझे चूसकर खाने में बड़ा मज़ा आता है।

    अब में उनके सामने आम को धीरे धीरे दबाते हुए चूसने लगा। अब वो मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी कि तुझे तो आम बहुत अच्छे से चूसना आता है। फिर में भी दो मतलब के शब्दों में बोला कि तुम बोलो तो दोनों आम को चूस चूसकर खा लूँ बड़ा मज़ा आता है और वो भी देखकर जोश में आ रही थी। अब मैंने बोला कि माँ तुम्हे आम नहीं खाना तो केले खा लो बड़े अच्छे और आकार में भी यह बड़े है, तुम्हे बहुत मज़ा आएगा और वो केला खाने लगी, वो केले पर अपने होंठो को फेरते हुए जीभ से चूसती हुई खा रही थी। अब में उसको कहने लगा कि माँ तुम भी आज केला बड़ी मस्ती में खा रही हो और वो मुझसे कहने लगी कि तू जब आम को चूस सकता है तो क्या में केला नहीं खा सकती? में शरमा गया क्योंकि यह सब कहने का मतलब कुछ अलग था और उसमे शरारत झलक रही थी। फिर वो खाने के बाद में पढ़ने बैठ गया और वो अपने कपड़े बदलने लगी थी वो गर्मियों के दिन थे और गरमी कुछ ज्यादा ही थी। दोस्तों में उस समय शर्ट उतारकर बस लूँगी पहनकर पढ़ने बैठा था, मेरी उस टेबल के ऊपर दीवार पर एक शीशा लगा हुआ था और में अपनी माँ को उस शीशे से देख रहा था।

    फिर वो मेरी तरफ देख रही थी और अपने कपड़े उतार रही थी, लेकिन वो सोच भी नहीं सकती थी कि में कांच से देख रहा था, उन्होंने अपना ब्लाउज खोलकर उतार दिया और में पहली बार डोरी वाली ब्रा में बँधे उनके बूब्स को देख रहा था। दोस्तों उनके बूब्स बहुत बड़े आकार के थे और वो उस ब्रा में समा भी नहीं रहे थे, इसलिए आधे नंगे बूब्स ब्रा के ऊपर से साफ झलक रहे थे। अब कपड़े उतारकर वो बिस्तर पर लेट गयी और अपनी छाती को एक हल्की सी चुन्नी से ढक लिया। दोस्तों एक पल के लिए तो मेरा मन करने लगा कि में उसी समय उनके पास जकड़ उनके बूब्स को देख लूँ और फिर मैंने सोचा कि यह सब ठीक नहीं होगा और में दोबारा अपना ध्यान लगाकर पढ़ने लगा। दोस्तों कुछ देर लेटे ही वो सो गयी और कुछ ही देर में वो चुन्नी उनकी छाती से सरक गई और अब साँसों के साथ ऊपर नीचे होती उनकी मस्त रसीली छाती मुझे साफ नजर आ रही थी। अब तक रात के बारह बज चुके थे मैंने अपनी पढ़ाई को बंद किया और में बत्ती को बुझाने ही वाला था कि उसी समय माँ की सुरीली आवाज़ मेरे कानो में पड़ी, बेटे इधर आओ ना। फिर में सुनकर उनकी तरफ बढ़ गया और अब उन्होंने अपनी छाती को दोबारा चुन्नी से ढक लिया था।

    अब मैंने पूछा कि माँ क्या हुआ? उन्होंने कहा कि बेटा तुम मेरे दूध को चूसो यह फिर से भारी हो गए है। अब मैंने कहा कि तुम पहले बोलती तो में पहले ही चूस लेता, तुम्हे आराम मिल जाता। फिर वो कहने लगी कि तुम पढ़ाई कर रहे थे, इसलिए मैंने तुम्हे परेशान करना उचित नहीं समझा और कोई बात नहीं है अब चूस लो, आओ मेरे पास ही लेट जाओ और वो कहने लगी कि बल्ब को भी बंद कर दो। फिर मैंने बल्ब को बंद कर दिया और छोटा बल्ब जलाकर में बिस्तर पर उनके पास लेट गया। दोस्तों जिस बदन को में सालों से निहारता रहा आज में उसी के पास चिपककर लेटा हुआ था और उसके निप्पल को चूस रहा था। अब में चूसते हुए निप्पल को दबा दबाकर बूब्स के चारों तरफ से हाथ फेरते हुए, दबाते हुए पूरी मस्ती भी ले रहा था और हाथ उनके बदन पर भी घुमा रहा था और वो अधनंगा शरीर मेरे बिल्कुल पास था। फिर में बोला कि माँ तुम घुटनों के बल सामने हाथ टिकाकर घोड़ा बनकर खड़ी हो जाओ में नीचे से मुहं लगाकर दूध पीऊँगा जिसकी वजह से दूध जल्दी से नीचे उतार जाएगा। अब वो तुरंत ही ऐसा करने के लिए तैयार हो गयी और में नीचे से उनके निप्पल को अपने मुहं में लेकर खींचकर चूसने लगा था और मैंने अपना एक हाथ उनकी कमर में डाल दिया।
    hindi sex stories अब उन्हे भी बहुत मज़ा आने लगा था, वो भी मन ही मन खुश हो रही थी और तभी वो अचानक से कहने लगी कि हाँ बेटा ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से चूस मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ऊह्ह्ह हाँ आज तू ठीक से चूस रहा है। अब मेरे भी पूरे बदन में सनसनी होने लगी थी और लंड भी खड़ा होकर टाइट हो गया था, उसी समय वो बोली कि बेटे यह ब्रा का हुक भी खोल दो और ठीक से चूसो। फिर मैंने बूब्स का दूध पीते हुए अपने एक हाथ से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को अलग कर दिया और अब में भी बहुत उत्तेजित हो गया और जोश में आकर पागल हो गया। अब में अपने पैर से माँ के पैर को सहलाने लगा था और तभी अचानक से उनका संतुलन बिगड़ गया और वो मेरे ऊपर गिर गयी। अब उनके बड़े आकार के बूब्स मेरी छाती से सट गये और मेरे खड़े लंड का दबाव उनकी जांघो, चूत के कुछ हिस्से पर पड़ा, जिसकी वजह से उन्हे भी करंट सा लगा और उनके मुहं से निकला उईईईईई। अब मैंने पूछा क्या हुआ? वो बोली कि कुछ नहीं रे चल तू ठीक से पी वो सीधी होकर लेट गई और में उनके ऊपर लेटकर बूब्स को चूस चूसकर दूध पीने लगा था। अब माँ अपनी चूत पर लगातार हाथ घुमा रही थी और फिर पेटीकोट में हाथ डाकर शायद चूत में ऊँगली भी डालने लगी थी।

    दोस्तों उस समय उनका पेटीकोट जाँघो के ऊपर आ गया था, मैंने मैंने उनको पूछा कि माँ क्या हो गया आज क्या नीचे भी भारी हो गया? तुम्हे कुछ तकलीफ़ हो रही है तो वहाँ भी ठीक कर दूँ। अब वो बोली तू यह क्या बोलता है? मैंने कहा तुम कहो वहाँ भी कुछ चूसना हो तो चूस लेता हूँ सिर्फ़ तुम्हे आराम मिलना चाहिए और मैंने अब माँ का चूम लिया और बोला कि मेरी प्यारी माँ मेरी अच्छी माँ तुम कितनी सुंदर हो, यह बदन बड़ा ही कोमल है। दोस्तों मेरा लंड अब अंडरवियर से बाहर निकलने के लिए ज़ोर लगा रहा था। मेरा सात इंच का लंड बहुत जोश में आ गया था, बूब्स को मसलते हुए में उनके बदन के बिल्कुल पास आ गया था और मेरा लंड उनकी जाँघो में रगड़ मारने लगा था। फिर उसी समय वो मुझसे कहने लगी कि बेटा यह मेरे पैरों में क्या चुभ रहा है? मैंने हिम्मत करके जबाब दिया कुछ भी नहीं तो है। अब उन्होंने पूछा क्या में हाथ लगाकर देखूं? और मेरे जबाब देने से पहले ही अपना एक हाथ वो मेरे लंड पर रखकर उसको टटोलने लगी थी। अब अपनी मुट्ठी में मेरे लंड को कसकर वो कहने लगी बाप रे बहुत कड़क है तेरा तो एकदम खड़ा हो गया और वो मुझसे पूछने लगी तू अभी क्या बातें कर रहा था? अब मैंने बोला कि माँ तुम बुरा मत मानना, आज तुम मुझे अपना सब कुछ दिखाओ ना।

    अब माँ कहने लगी कि यह तो सिर्फ़ पति पत्नी के बीच ही होता है और तुम अभी बच्चे हो अभी तुम्हारी शादी भी नहीं हुई है और यह सब शादी के बाद ही होता है। अब मैंने कहा तो क्या हुआ हम सिर्फ़ आज करेंगे, प्लीज़ माँ आज यह मौका तुम मुझे दो ना, शादी के बिना भी तो कर सकते है। फिर उसके उत्तर दिया, लेकिन यह पाप है। अब में उसकी निप्पल को अपनी उंगली के बीच लेकर मसलते हुए बोला कि यह पाप करने में बहुत मज़ा आता है प्लीज़ माँ मुझे वो मज़ा दे दो ना प्लीज़ करने दो ना। अब वो मेरी तरफ मुड़ गई और अपना एक हाथ मेरी अंडरवियर में डालकर मेरे फड़फड़ाते हुए लंड को ऊपर निकाल लिया और लंड को कसकर पकड़े हुए वो अपना हाथ लंड की आखरी हिस्से तक ले गयी। फिर मैंने भी तुरंत ही उनकी चूत तक अपनी उँगलियों को पहुंचा दिया और मेरे लंड का आकार महसूस करके वो बहुत हैरान हो गयी और कहने लगी कि बेटा तू तो बड़ा हो गया है। फिर मैंने कहा कि यह तुम्हारा ही है और अब माँ कहने लगी कि मुझे क्या पता था कि तुम्हारा इतना बड़ा होगा? वो मुझसे बातें करते हुए मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर खींच रही थी और कसकर दबा भी रही थी।

    फिर मैंने भी बिना देर किए पेटिकोट को ऊपर उठा दिया और वो कहने लगी तू यह क्या करता है? मैंने कहा कि सिर्फ़ आज एक बार फिर नहीं कहूँगा देखने दो ना, आज तो कोई भी नहीं है। फिर वो मेरे तने हुए लंड को अपने हाथों में लेकर सहलाते हुए वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी। अब उनके बूब्स मेरे मुँह के बिल्कुल पास थे और में उन्हे कसकर दबा रहा था और फिर वो बोली कि अच्छा ले चल और अचानक उन्होंने अपने एक बूब्स को मेरे मुँह में डालते हुए कहा कि चूसो इनको और आज अपनी इच्छा पूरी कर लो, जी भरकर दबाओ, चूसो और मज़े लो। फिर मैंने यह बात सुनकर खुश होकर दोनों बूब्स को बारी बारी से अपने मुँह में भर लिया और में जोश में आकर ज़ोर से चूसने लगा और वो सिसकियाँ भरने लगी, कहने लगी ऊफ्फ्फ वाह मज़ा आ गया, हाँ ज़ोर ज़ोर से चूस ना। अब में कसकर बूब्स को दबा रहा था, जैसे कि आज में उनका पूरा रस निचोड़ दूंगा और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। उनके मुहं से अब ओह्ह्ह्ह स्सीईईई की आवाज़ निकल रही थी। अब में कहने लगा कि तुम नहीं जानती कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है? और में दोनों अनारों को कसकर पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हे चूस रहा था।

    अब उनसे भी नहीं जा रहा था, इसलिए गरम होकर वो भी मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और फिर उन्होंने अपनी एक जांघ को मेरी जांघ के ऊपर चड़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघ के बीच रख लिया। फिर उसी समय मुझे उनकी जाँघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ, दोस्तों यह उनकी चूत थी, क्योंकि उस समय माँ ने पेंटी नहीं पहन रखी थी। अब मेरे लंड का टोपा उनकी झांटो में घूम रहा था, मैंने कहा कि माँ तेरा नीचे वाला अंग तो बहुत ही मुलायम है और अब मेरे सबर का बाँध टूट रहा था। फिर में कहने लगा कि माँ मुझे कुछ हो रहा और अब में अपने आपे में नहीं हूँ, प्लीज़ तुम ही मुझे अब बताओ कि में क्या करूं? वो कहने लगी कि मुझे लगता है कि तू आज मानेगा नहीं, चल तेरी जो भी इच्छा है वो तू कर ले। दोस्तों वो बड़े ही मादक अंदाज़ में मुस्कुराने लगी और मेरे लंड को आज़ाद करते हुए बोले कि ठीक है, मुझे लगता है कि अपने इस बेटे को मुझे ही सब कुछ सीखना पड़ेगा, लेकिन तुम मुझे गुरु दक्षिणा पूरे मन से देना। अब मैंने तुरंत ही उनके पेटीकोट का नाड़ा खींचा और कहा कि अब तो इसके दर्शन करा दो, कहते हुए मैंने उनका पेटिकोट को नीचे किया और माँ अपने कूल्हों ऊपर कर दिया, जिसकी वजह से पेटिकोट उनके पैरों से उतरकर अलग हो गया।

    फिर में भी पलंग से नीचे उतर गया और मैंने अपनी अंडरवियर को उतार दिया, उसके बाद में अपने तने हुए लंड को लेकर अपनी माँ के सामने खड़ा था और अब माँ भी पूरी तरह से नंगी होकर मेरे सामने लेटी हुई थी और वो अपने रसेली होंठो को अपने दांतों में दबाकर मेरी तरफ देखती रही। फिर अपने दोनों पैरों को पूरा फैला दिया और मुझे रेशमी झांटों के जंगल के बीच छुपी हुई उनकी रसीली गुलाबी चूत का द्रश्य देखने को मिला। दोस्तों उस छोटे बल्ब की हल्की रोशनी में चमकते हुए नंगे जिस्म को देखकर में उत्तेजित हो गया और मेरा लंड मारे खुशी के झूमने लगा था। अब में तुरंत उनके ऊपर लेट गया और उनके बूब्स को दबाते हुए, उनके रसीले होंठो को चूसने लगा और उन्होंने भी मुझे कसकर अपने आलिंगन में कसकर जकड़ लिया और मेरे चुम्मे का जवाब देते हुए मेरे मुँह में अपनी जीभ को डाल दिया है। अब में भी उनकी जीभ को मज़े से चूसने लगा और फिर पूरे जोश के साथ कुछ देर तक तो हम दोनों ऐसे ही चिपके रहे। फिर माँ ने मेरी पीठ से हाथ ऊपर लाकर मेरा सर पकड़ लिया और नीचे की तरफ किया। अब में अपने होंठ उनके होंठो से नीचे ले आया और कंधो को चूमते हुए बूब्स पर पहुँच गया। एक बार फिर उनके बूब्स को मसलते हुए और खेलते हुए चूसने लगा।

    अब उन्होंने बदन के निचले हिस्से को मेरे बदन के नीचे से निकाल लिया और अपने एक हाथ से वो मेरा लंड पकड़कर उसको मुट्ठी में लेकर सहलाने लगी और अपने दूसरे हाथ से मेरा एक हाथ पकड़कर अपने पैरों के बीच ले गयी। फिर जैसे ही मेरा हाथ उनकी चूत पर पहुँचा तो उन्होंने अपनी चूत को रगड़ दिया और किसी भी समझदार को बस एक इशारा ही बहुत होता था। अब में उनके बूब्स को चूसता हुआ उनकी चूत को रगड़ने लगा था और मैंने अपनी उंगली को चूत के मुँह पर दबा दिया और फिर मैंने अपनी उंगली को उनकी चूत की दरार में घुसा दिया, जिसकी वजह से मेरी ऊँगली पूरी तरह से अंदर चली गई। अब में अपनी ऊँगली को उनकी चूत में इधर उधर घुमाने लगा था। फिर जैसे ही मेरी उंगली उनकी चूत के दाने से टकराई तो उन्होंने ज़ोर से सिसकियाँ लेकर अपनी जाँघो को कसकर बंद कर लिया और वो दोनों कूल्हों को उठाकर मेरे हाथ से खेलने लगी। दोस्तों जोश की वजह से उनकी चूत से पानी बह रहा था, थोड़ी देर बाद तक ऐसे ही मज़ा लेने के बाद मैंने अपनी उंगली को चूत से बाहर निकाल लिया। अब में सीधा होकर उनके ऊपर लेट गया। उन्होंने अपने दोनों पैरों को फैला दिया और मैंने अपने फड़फड़ाते हुए लंड को चूत के मुहं पर रख दिया और हल्के से चूत के मुहं पर रगड़ने लगा, उनकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

    फिर उसी समय अचानक से मेरा लंड उनकी चूत में थोड़ा सा अंदर चला गया और वो कहने लगी कि प्यार से डालो नहीं तो मुझे दर्द होगा आहह्ह्ह। अब उनकी झांटों और चूत का मुलायम स्पर्श मुझे पागल बना रहा था और फिर जैसे ही मैंने धक्का लगाया एक ही धक्के में लंड अंदर चला गया। दोस्तों इससे पहले कि माँ संभले या अपना आसान बदले मैंने दूसरा धक्का लगा दिया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत के अंदर हो गया। अब वो दर्द की वजह से चिल्ला गई ऊऊईईईई आईईईईईई माँ ओह्ह्ह्ह तुम ऐसे ही कुछ देर हिलना नहीं मुझे बड़ी जलन हो रही है। फिर में अपना लंड उनकी चूत में डालकर वैसे ही चुपचाप पड़ा रहा और कुछ देर बाद मैंने हाथों को आगे बढ़ाकर दोनों बूब्स को पकड़ लिया और मुँह में लेकर चूसने लगा, जिसकी वजह से उनको बड़ी मस्ती आराम मिलने लगा था और अब उन्होंने अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया। अब वो कहने लगी कि अब तुम देर ना करो चोदो मुझे लो मज़ा इस जवानी का मेरे राजा और वो अपनी गांड को हिलाने लगी और मैंने वैसे ही करना शुरू किया। अब मेरा लंड धीरे धीरे उनकी चूत के अंदर बाहर होने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैंने अपनी रफ्तार को बढ़ा दिया और मेरा लंड बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा था।

    अब हम दोनों को पूरी मस्ती मज़ा आ रहा था और वो नीचे से अपनी कमर को उठाकर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी, लेकिन जैसे ही में ज्यादा रफ्तार बढ़ाता लंड बाहर निकल जाता। फिर माँ से रहा नहीं गया और करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से उतार दिया और मुझे लेटाकर वो मेरे ऊपर आ गयी, वो अपनी दोनों जाँघो को पूरा फैलाकर अपने गद्देदार कूल्हों को मेरे ऊपर रखकर बैठ गयी। अब उनकी चूत मेरे लंड पर थी और हाथ मेरी कमर को पकड़े हुए थे और फिर वो मुझसे कहने लगी कि अब में तुम्हे बताती हूँ कि चुदाई कैसे करते है? मेरे ऊपर लेटकर एक धक्का लगा दिया और मेरा लंड घप से चूत के अंदर चला गया। फिर माँ ने अपने रसीले बूब्स को मेरी छाती पर रगड़ते हुए अपने गुलाबी होंठो को मेरे होंठो पर रख दिया और मेरे मुँह में जीभ को डाल दिया। फिर माँ ने बड़े ही मज़े से अपनी कमर को हिलाकर धक्के लगाना शुरू किया। वो बहुत कसकर धक्के लगा रही थी, उनकी चूत मेरे लंड को अपने में समाए हुए बड़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी और मुझे लग रहा था कि में जन्नत में पहुँच गया हूँ। अब माँ मेरे ऊपर मेरे कंधो को पकड़कर घुटनों के बल बैठ गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर को हिलाकर लंड को तेज़ी से अंदर बाहर लेने लगी थी।

    फिर उनका पूरा बदन हिल रहा था और साँसे बड़ी तेज़ तेज़ चल रही थी और साथ ही बूब्स भी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैंने हाथ को आगे बढ़ाकर दोनों बूब्स को पकड़ लिया और में ज़ोर से मसलने लगा और उनकी रफ़्तार बढ़ती ही जा रही थी। अब कमरे में फच फच की आवाज़ गूँज रही थी और जब उनकी सांस फूल गयी। तब वो खुद ही नीचे आकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और पैरों को फैलाकर ऊपर उठा लिया। अब वो मुझसे कहने लगी कि में थक गयी हूँ मेरे राजा अब तुम अपना मोर्चा संभालो। फिर में झट से उनकी जाँघो के बीच बैठ गया और निशाना लगाकर झटके से लंड को अंदर डाल दिया और उनके ऊपर लेटकर धक्के लगाने लगा और माँ ने अपने पैरों को मेरी कमर पर रखकर मुझे जकड़ लिया और अपने कूल्हों को उठाकर चुदाई में साथ देने लगी। फिर में उनके बूब्स को मसलते हुए ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था और वो अपनी कमर को हिलाकर कूल्हों को उठाकर चुदाई के मज़े ले रही थी और वो मुझसे कहे जा रही थी आह्ह्ह्हह ऊओह्ह्ह ऊऊहह्ह्ह मेरे राजा मज़ा आ गया। यह कहते हुए मेरी माँ ने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसी समय उनकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ना शुरू कर दिया।

    अब तक मेरा लंड भी वीर्य छोड़ने वाला था और में उनको कहने लगा कि में भी गया मेरी जान और मैंने भी अपने लंड का वीर्य छोड़ दिया और में हांफते हुए उनके बूब्स पर सर रखकर चिपककर लेट गया। दोस्तों यह मेरी पहली चुदाई थी, इसलिए मुझे बड़ी थकान महसूस हो रही थी और वो भी अपने एक हाथ से मेरे सर को धीरे धीरे से सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरी पीठ सहला रही थी। फिर माँ ने करवट लेकर मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और मुझे अपनी बाहों में कसकर धीरे से मेरे कान में फुसफुसाकर कहने लगी, वाह बेटा तुमने तो कमाल कर दिया, तुम्हारे लंड में वाह क्या गजब की ताकत है? फिर मैंने कहा कि असली कमाल तो आपने कर दिया है आजतक तो मुझे पता ही नहीं था कि चूत और लंड के इस खेल से इतनी मस्ती आती है और यह तो बस आपकी मेहरबानी है जो कि आज मेरे लंड को आपकी चूत की सेवा करने का यह पहला मौका मिला। अब भी मेरा लंड उनकी चूत के बाहर झांटों के जंगल में रगड़ मार रहा था और फिर माँ ने अपनी मुलायम हथेलियों में मेरे लंड को पकड़कर सहलाना शुरू किया।

    फिर अचानक ही बच्चे के रोने की आवाज़ आई और वो उसको सम्भालने लगी और फिर उसके बाद में सो गया ।।

    धन्यवाद …

  • चुदक्कड़ चाची चोदू चाचा

    नमस्कार मित्रो, मैं अनिल, मेरी उम्र चौबीस साल है, ये मेरी पहली कहानी है. उम्मीद है आप सभी को पसन्द जरूर आएगी.

    यह चुदाई कहानी मेरे सगे चाचा चाची की है. मेरे चाचा की उम्र 55 साल है और चाची 50 साल की हैं, लेकिन देखने में चाची 40 की लगती हैं. चाची का नाम किरण है.. वो एक कसे हुए गदराये से बदन की मालकिन हैं. हालांकि मेरी चाची थोड़ी सी मोटी सी हैं.. लेकिन मोटी होते हुए भी मन को बेचैन कर देने वाली जवानी की दुकान हैं. उनकी विशाल थलथल करती गांड.. नागिन सी कमर पतली पर टिकी है.. जब वो चलती हैं तो मानो उनके मोटे चूतड़ों के हिलने से कयामत ही बरसती है. जब चाची अपनी गांड के गोले हिला हिला कर चलती हैं, तो मेरा लंड अनाकोंडा सा होकर फुंफकार मारने लगता है. उनकी चूचियां भी बहुत बड़ी और ठोस, बिल्कुल तने हुए पपीते की तरह हैं. उनके मुलायम पेट पे जो गहरी नाभि सामने से नजर आती है, आह.. उसका क्या कहना.. मेरा दिल तो करता है उनकी नाभि में ही लंड पेल दूँ. मीडियम कद की चाची अच्छों अच्छों का लंड खड़ा कर देने वाले जवानी की खान लगती हैं.

    मैं हमेशा ही अपनी सेक्सी चाची को ख्वाबों में चोदता हूँ.. और इस फिराक में लगा रहता हूँ कि चाची को कैसे चोदूँ.

    पर चाची वैसी औरत नहीं थीं. वो चाचा से बहुत प्यार करती हैं.

    मैं ज्यादातर चाची के घर पे ही चाची के साथ समय गुजारता हूँ.. और नजरें बचा कर चाची को घूरता रहता हूँ. मेरी छिपी हुई नजरें चाची की अधखुली चुची.. नाभि और मटकती गांड देख कर लंड को मुठ्ठ मारने पर मजबूर कर देती हैं. मेरे चाचा स्कूल टीचर हैं.. वे देखने में वो भी थोड़े मोटे ही हैं.

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    बात उस दिन की है.. मैं करीब शाम को आठ बजे चाची के घर पहुंचा, चाची खाना बना रही थीं और चाचा हॉल में पड़े बिस्तर पर लेटे कोई किताब पढ़ रहे थे. मुझे देखते ही चाचा ने मुझे बैठने को कहा, मैं चाचा के पास बैठ गया और इधर उधर की बातें करने लगा.

    तभी किचन से चाची की आवाज आई- अनिल.. खाना यहीं खा लेना.
    मैंने पूछा- कुछ विशेष बन रहा है क्या चाची?
    “हां.. सत्तू का पराँठा बना रही हूँ.”
    “ओके चाची..”

    इतना कहने के बाद मैं चाचा से बात करने लगा. रात के 9:45 बज गए. तभी चाची खाना लेकर आ गईं. चाचा के साथ मैं भी खाना खाने लगा.. साथ में चाची भी खाना खाने लगीं.

    तभी अचानक से बारिश होना शुरू हो गई. बारिश इतनी तेज होने लगी थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी. हम लोग खाना खा चुके थे, लेकिन बारिश बन्द होने का नाम ही नहीं ले रही थी. रात के 10 बज गए मौसम काफी खराब हो गया था.

    चाची बोलीं- अनिल तुम यहीं पर सो जाना, तेज बारिश हो रही है.. घर कैसे जाओगे?

    मेरे पास भी दूसरा कोई चारा नहीं था सो मैंने हामी भर दी. चाचा चाची अपने कमरे में चली गए और अन्दर से दरवाजा बन्द कर लिया. मैं वहीं हॉल में सो गया.. मेरी आंखों से नींद कोसों दूर थी.

    तभी मेरे कानों में चाची की चूड़ियों के खनकने आवाज सुनाई दी. मेरे कान खड़े हो गए और ये सोच कर मेरा लंड खड़ा हो गया कि शायद चाचा चाची चुदाई कर रहे हैं. मैं झट से बिस्तर से उठा और दबे पांव खिड़की के पास चला गया और खिड़की से कान सटा कर सुनने लगा.
    चाची फुसफुसा कर चाचा से कह रही थीं- अनिल बाहर सोया हुआ है.. कहीं उसको पता न चल जाए, आज छोड़ दीजिए कल कर लेना.
    चाचा- आज पाँच दिन हो गए हैं मेरी रानी.. आज तो बर्दाश्त नहीं हो रहा. अनिल को पता भी चल गया तो क्या हुआ.. बेचारा अपनी चाची की चुदाई सुनकर मुठ्ठ मार के सो जाएगा.
    चाची- बहुत बड़े चुदक्कड़ हो आप..
    चाचा- क्या करूँ रानी, तुम्हारी चूत ही ऐसी है कि चोदे बिना नहीं ठहर सकता.

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    उन दोनों की गर्म बातें सुन कर मेरा लंड तो सातवें आसमान पर था. मेरे पूरे बदन में एक कंपकंपी सी होने लगी, मुँह हलक तक सूख गया, कनपटी गर्म हो गईं. मैं अपने चाचा चाची की चुदाई देखने के लिये तड़प उठा. तभी अन्दर से चुम्बन की आवाजें आने लगीं. शायद दोनों एक दूसरे को ताबड़तोड़ चूम रहे थे. मैं पागल सा हो गया, खिड़की भी बन्द थी, अब उन दोनों की चुदाई कैसे देखूँ. मैं विचलित हो गया.. पता नहीं ऐसा मौका फिर कभी हाथ आएगा भी या नहीं, मैं ये मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहता था.

    तभी चाची की लम्बी सीत्कार सुनाई दी.
    चाचा बोल रहे थे- आह.. क्या चुची बनाई है भगवान ने.. जी चाहता है इसे रात भर चूसता ही रहूँ.. पुच.. पुच..
    चूमने की आवाज सुनाई दी.. तो लगा कि शायद चाचा चाची की चुची चूसने लगे थे.
    चाची ‘आह… ओह…’ कर रही थीं.
    मेरा हाल बुरा था, मैं अपना लंड पकड़ कर तड़पने लगा. तभी मैं हॉल की दूसरी तरफ बनी खिड़की के पास दबे पांव गया, ऊपर वाली खिड़की खुली हुई थी.. अन्दर से रोशनी आ रही थी. ये देखते ही मेरी आँख मारे खुशी के चमक उठीं, मेरे दिल धड़कन तेज हो गईं. मैं किसी तरह खिड़की के पास पहुंचा.. अन्दर झाँका और जो नजारा नसीब हुआ, उसे देख कर मैं हिल गया.

    मैं सर से पांव तक काँपने लगा, मुझे अपने पैरों पर खड़ा होना मुश्किल हो रहा था.
    अन्दर बिस्तर पर चाची पूरी नंगी चित लेटी हुई थीं और चाचा उनकी चूचियों पर टूटे पड़े थे.

    आज पहली बार किसी औरत को इतने करीब से पूरी नंगी देख रहा था. क्या बदन था चाची का.. दूध सी चमचमाती गदरायी हुई मादक जवानी सामने मचल रही थी. जिन चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से देखा करता था, आज वो दोनों कठोर मम्मे मेरी आंखों के सामने चमचमा रहे थे. चाची की दोनों मोटी मोटी जांघों के बीच चूत नजर आ रही थी. काफी फूली हुई बड़ी सी चूत थी, जिस पर छोटी छोटी झांटें चूत की सुन्दरता बढ़ा रही थीं.

    चाचा बार बार चाची कि चूत को मुठ्ठी भर पकड़ कर ऐसे मसल रहे थे मानो चुची मसल रहे हों. चाची भी बार बार अपनी गांड उछाल रही थीं.

    जैसे ही चाचा ने अपनी एक उंगली को चाची की चूत में घुसाया कि चाची का पूरा बदन सनसना उठा और वो अपने बदन को ऐंठते हुए चूतड़ उछालते हुएऔर बड़बड़ाने लगीं- ओह.. मेरे राजा.. बहुत मजा आ रहा है..
    चाचा- आह.. तुम्हारी चूत बहुत गर्म है मेरी चुदक्कड़ डार्लिंग..
    चाची- ओह मेरे चोदू राजा.. जब तक आपका लंड जब अन्दर नहीं घुसेगा, आपका वीर्य जब तक मेरी चूत की गहराई में नहीं गिरेगा, तब तक मेरी चूत इसी तरह आग उगलती रहेगी.. आह.. जल्दी से पेल दो.
    चाचा ने अपने हाथ की स्पीड बढ़ाते हुए मादक स्वर में कहा- कसम से आज तेरी चूत को बहुत चोदूँगा.. बहुत चोदूंगा.. मेरी चुदक्कड़.. मेरी प्राण प्यारी.. तेरी चूत चोदे बिना कहां रह पाता हूँ मैं..

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    इतना कहने के बाद चाचा ने अपना हाथ चाची की चूत से हटाकर एक चुची को दबोच लिया और पागल की तरह दोनों हाथों से दोनों चुची मसलने लगे. फिर बारी बारी से दोनों चुची को चूसने लगे.

    चाची का जोश चार गुना बढ़ गया. वो पागलों की तरह चाचा से लिपट गईं. चाची का पूरा बदन कांपने लगा.. उनकी आंखों के डोरे बिल्कुल लाल हो गए.. सांसें तेज हो गईं.. नथुने फूलने लगे और उनके मुँह से मादक सीत्कारें निकलने लगीं.

    चाचा समझ गए कि अब उनकी बीवी को लंड चाहिए है. तभी चाचा चित लेट गए और उन्होंने अपना कच्छा उतार दिया. जैसे ही चाचा ने अपना कच्छा उतारा कि उनका लंड फुंफकार मारता हुआ बाहर निकल आया. चाचा का लंड देखते ही चाची मानो पागल हो गईं.

    चाची झट से चाचा का मोटा काला लंड पकड़ कर मसलते हुए चूमते बोले जा रही थीं- हे भगवान क्या लंड दिया है मेरे पति को आह… कितना मस्त लंड है.. आज जी भर के चुदवाऊंगी इस लंड से…
    चाचा का मोटा लंड किसी बैंगन के समान था. लंड का सुपारा काफी बड़ा था, जैसे टेनिस की गेंद हो.

    चाची सुपारा देखकर हिनहिना उठीं और अपनी मुठ्ठी से सुपारा पकड़ कर बोलने लगीं- बहुत बड़ा सुपारा है आपका.. मेरी चूत आज निहाल हो जाएगी..
    चाचा- तो मुँह में भर लो न इस सुपारे को मेरी रंडी रानी..

    चाची जैसे ही सुपारा मुँह में डाला कि चाचा के मुँह से सीत्कार निकल गई और वो नीचे से कमर चलाने लगा. चाची बड़े चाव से लंड का सुपारा चूसने लगीं.
    दो मिनट बाद ही चाची कहने लगीं- अब रहा नहीं जाता.. जल्दी से चोद दो न, चूत में बहुत तेज खुजली हो रही है.

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    चाची चाचा का लंड को जोर जोर से हिलाते हुए बोले जा रही थीं- जल्दी घुसा दो अपना मूसल लंड मेरी चूत में.. इस मोटे सुपारे से चोदो मुझे..
    चाचा- आह.. कितनी बेचैन है तू लंड के लिये मेरी रानी..

    चाची लंड को जोर जोर से हिलाते हुए कहने लगीं- आपका लंड भी तो मेरी चूत चोदने के लिए देखो.. कितना फुंफकार मार रहा है.. क्या गजब का लंड है आपका.. आओ अब देर मत करो चोद लो.. प्लीज जल्दी से पेल दो मेरी झांटों से भरी चूत में अपना लौड़ा पेल दो..

    उन दोनों की बातें सुनकर मेरा लंड जोश के मारे और ज्यादा सख्त हो गया. मैंने मुठ्ठ मारना शुरू कर दिया. उधर चाचा ने चाची को चित करके उनके दोनों पैरों को घुटने तक मोड़ा और कंधों तक ले लिया. इस वजह से चाची की चूत और गांड आसमान को देखने लगी.

    क्या दिलकश नजारा था.. ऐसी पोजीशन में चाची की चौड़ी गांड देखने में और ज्यादा चौड़ी नजर आ रही थी. मांसल और भरी फूली हुई चूत और चूत की मोटी मोटी फांकें मुझे पागल बना रही थीं.
    मैं अपना लंड को जोर जोर से मसलने लगा.
    तभी मैंने देखा कि चाचा ने अपना लंड चाची की चूत की फांकों पर रख दिया. चूत पर लंड लगते ही चाची मचल उठीं और कराह भरते हुए चाचा का लंड पकड़ कर चूत की फांकों पर रगड़ने लगीं. उधर चाचा भी अपने लंड को फांकों पर रगड़ने लगे. वे दोनों पूरे जोश में थे. चाचा चूत को देखते हुए फांकों पर लंड रगड़ रहे थे. चाची भी अपने सर को उठा कर चूत पर रगड़ते हुए लंड को देख रही थीं.. और जोर जोर से सिस्कार रही थीं. चाची का चेहरा चुदास के मारे लाल हो गया था, नाक फूलने और पिचकने लगी थीं. वे आंखें फाड़ कर लंड को देखे जा रही थीं.

    चाची- कितना रगड़ रहे हो.. चूत पनिया गई है.. अब तो पेल दो न!
    चाचा- थोड़ा सा सबर कर न मेरी चुदक्कड़.. चूत की फांकों पर लंड रगड़ने में बहुत मजा आ रहा है.. थोड़ा रगड़ का मजा लेने दो मेरे रानी.. कितना गर्म है तुम्हारी बुर.. ऐसा लगता है मेरे लंड को आज जला ही देगी.
    चाची- आपका लंड भी तो बहुत गर्म है.
    चाचा- पेलता हूँ अब..
    चाची- हां पेल दो..
    चाचा- क्या पेलूँ?
    चाची- अपना लंड मेरी चूत में पेल दो..
    चाचा- आज बहुत पेलूँगा साली..
    चाची- तो पेल दो न भोसड़ी के.. खाली पेलूँ पेलूँ बोलते हो.. और पेलते नहीं हो.. प्लीज मेरी जान अब पेल दो अपना मूसल लंड..

    तभी चाचा ने अपना लंड चाची की चूत के छेद पर रखकर अपने दोनों हाथों से चाची की दोनों चुचों को पकड़ कर जोर से लंड ठेला, तो सुपारा चूत के अन्दर घुस गया. चाची गनगना उठीं.. और उन्होंने नीचे से अपने चूतड़ों को उचका दिया. इससे आधा लंड चाची की चूत के अन्दर घुस गया.

    चाची जोर जोर से सिसकारने लगीं.. और मादक स्वर में कराहते हुए बोलीं- ओह.. राजा.. स्वर्ग में पहुंच गयी मैं..
    चाचा- अभी तो आधा लंड ही घुस पाया है मेरी जान.. और तुम स्वर्ग में पहुंच गईं.. आह ले..
    चाची- पूरा पेलो न.. बहुत मजा आ रहा है.
    चाचा- इस उम्र में भी तेरी चूत इतनी कसी हुई है कि एक बार में घुसता ही नहीं है.
    चाची- मेरी चूत कसी हुई नहीं है मेरे राजा.. आपका लंड ही इतना मोटा है कि जल्दी घुसता नहीं है.

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    इतना कहकर चाची ने एक बार फिर से अपनी गांड को जोर के उछाल दिया.. और इसी वक्त चाचा ने भी जोर से लंड ठेल दिया. इस बार पूरा का पूरा लंड जड़ तक समा गया. चाची एक बार फिर से एक लम्बी सिसकारी भरते हुए दाँतों पर दाँत बैठा कर अपनी गांड को जोर जोर से उछालते हुए बोलने लगीं- आह.. अब चोदो मेरे राजा.. जितना चोदना है.. मेरी चूत को चोद चोद कर लाल कर दो.. आह चोदो मेरी चूत को.

    चाचा चाची को जोर जोर से चोदने लगे. ऊपर से चाचा का लंड ठाप मार रहा था और नीचे से चाची चूतड़ उछाल रही थीं. दोनों तरफ जोश बराबर था, दोतरफी धकापेल चलने लगा.. दोनों तरफ से चुदाई का खेल चलने लगा. दोनों एक दूसरे को चोदने लगे. पूरा कमरा गूँज उठा, पलंग चुँ.. चुँ.. करने लगा.

    चाचा का जोश शायद बहुत ज्यादा बढ़ गया था.. वो किसी सांड की भांति हुँकार भरते हुए चाची को चोदने लगे. चाची भी रुकने का नाम नहीं ले रही थीं, वो उसी तरह बेतहाशा अपनी भारी भरकम गांड को उछाले जा रही थीं.

    चाची के चूतड़ों की उछाल देखकर मैं जोश के मारे थरथर कांपने लगा. मैं तो सोच में पड़ गया कि इस उम्र में भी एक गाँव की देहाती औरत इस कदर से चुदाई कर सकती है.

    चाचा- कैसा लग रहा है मेरी लंडखोर रानी..
    चाची- बहुत मजा आ रहा है मेरे चुदक्कड़ राजा..
    चाचा- आज रात भर चोदूँगा..
    चाची- हां मेरे राजाजी.. जितना मर्जी उतना चोदो.. मेरी चूत तो तुम्हारे लंड के लिए ही तो बनी है.. तुम्हारे लंड के सिवाए दुनिया का कोई लंड मेरी चूत की आग को नहीं बुझा सकता.
    चाचा- इतना मजा देता है मेरा लंड तेरी चूत को?
    चाची- हां राजा.. बहुत मजा देता है तुम्हारा लंड..

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    चाचा का जोश और बढ़ गया, तभी चाचा ने चाची के दोनों पैरों को सीधा किया और चाची के ऊपर छा गए. वे दोनों चुची को अपने दोनों हाथों से कस कस कर मसलते हुए चोदने लगे. चाची भी अपने दोनों हाथ से चाचा की गांड पकड़ कर उनको अपनी तरफ दबा कर बदन को ऐंठने लगीं.

    तभी चाचा का मुँह और चाची का मुँह एक दूसरे से गुत्थमगुत्था करने लगा और जोर लगा कर चोदने और चुदवाने लगे. चुदाई के कारण चाची की चूत बिल्कुल पानी पानी हो गयी.. जिसकी वजह से चूत से पचर.. पचर की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी. चाचा अपने लंड से नीचे चाची की चूत चोद रहे थे और ऊपर अपनी जीभ से चाची के मुँह को चोद रहे थे. चाची की चूत से पचर.. पचर की और तेज आवाज आने लगी थी और उनके मुँह से गुँ.. गुँ की आवाज भी चाचा की चुदास को गति दे रही थी.
    इस तरह का चुदाई देख कर इधर मेरे लंड से पिचकारी निकलना शुरू हो गया. मैं झड़ गया.. लेकिन वो दोनों चुदाई करते ही जा रहे थे.

    तभी चाची बोलीं- अब मैं चोदूँगी ऊपर चढ़ कर..
    चाचा- आजा मेरी रानी..

    इतना कहकर चाचा चाची के ऊपर से एक पलटी मार कर चित लेट गए. चाचा का मोटा लंड और मोटा हो गया था. लंड की नसें उभर आई थीं.. सुपारा खुला हुआ लाल नजर आ रहा था. चूत के पानी से नहाया हुआ लंड झटके पर झटके खा रहा था.

    यह देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा. तभी चाची चाचा के ऊपर सवार हो गईं. चाची की भारी भरकम गांड मोटी और गहरी गांड की दरार देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. चाची ने चाचा के लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर टिकाया और अपनी भारी भरकम गांड का भार लंड पर छोड़ दिया. पूरा लंड सरसराता हुआ चूत के अन्दर समा गया. अब मुझे सिर्फ चाचा के आंड दिखाई दे रहे थे.

    फिर चाची ने अपनी गांड को चाचा के लंड पर पटकना शुरू किया. उनके चूचे मस्त डिस्को करने लगे थे. थप.. थप.. की मस्त आवाजों से कमरा गुंजायमान हो गया.
    चाची- अब बोलो.. राजा जी, मैं चोद रही हूँ तो कैसा लग रहा है?
    चाचा- बहुत मजा देती हो तुम.. अभी लंड पूरा अन्दर तक घुसा हुआ है.

    चाची और जोर जोर से हिलने लगीं, चाची अपनी गांड पटक पटक कर चाचा को चोद रही थीं. उनकी मांसल गांड थिरक थिरक कर हिल रही थी. चाचा भी नीचे से कमर चलाते हुए चाची की हिलती हुई चुचियों पर नजर टिकाए हुए थे.
    चाची पागलों की तरह चाचा को चोद रही थीं. चाची की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी, वे जोर जोर बोले जा रही थीं- चोद.. चोद.. साले.. चोद मुझे..
    चाचा- वाह.. मेरी रानी क्या चोद रही है तू मुझे.. कितनी चुदासी चूत है तेरी.. मेरी छिनाल.. मेरी चुदक्कड़.. आज मेरा लंड तेरी चूत में ही टूट जाएगा.. आह कितनी बड़ी चुदक्कड़ है तू.. आह.. साली हर रोज चुदवाती है.. फिर भी तेरी चूत की आग शान्त नहीं होती.
    चाची- ये तो तुम्हारे लंड का कमाल है.. कोई भी औरत तुम्हारा लंड जो एक बार देख ले, वो तुमसे चुदवाये बिना नहीं रह पाएगी.. तुम्हारा लंड ही ऐसा है कि चुदवाए बिना नहीं रह सकती..

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    इतना सुनते ही चाचा झट से उठ के बैठ गए. चाची के दोनों पैरों को पीछे की ओर किया और हाथों से चूतड़ पकड़ कर चोदने लगे. चाची भी चूतड़ चला रही थीं और चाचा भी.. दोनों तरफ से चूतड़ चल रहे थे.

    चाची की एक चुची को मुँह भर रख कर चाचा जोर जोर से चूसने लगे और चूतड़ के मांस को मुठ्ठी भर पकड़ कर अंधाधुँध चोदने लगे. चाची जोर जोर से आह.. उह.. करने लगीं. चाचा बार बार चाची की गांड पर थपकी लगाते और फिर चूतड़ के मांस को मुठ्ठी भर पकड़ कर चोदने लगते.

    चाचा- रानी अब थोड़ा घोड़ी बन जाओ.. तुम्हारी गांड की तरफ से चूत को चोदूँगा.. आह.. तुम्हारी विशाल गांड देख देख कर चोदूँगा.
    चाची झट से घोड़ी बन गईं.. चाचा वक्त गंवाए बिना जल्दी से चाची के पीछे आए और अपने लंड को फिर से चाची की चूत में घुसा दिया. फिर चाची की गांड पकड़ कर चोदते हुए बोलने लगे.

    चाचा- बाप रे बाप.. क्या गांड है मेरी रानी की.. दिल तो करता है तुम्हारी गांड भी मारूं.
    चाची- पहले चूत की आग शान्त करो गांड किसी और दिन मार लेना राजा.. अभी चूत की खुजली खत्म नहीं हुई है.. ऐसे ही चोदो..
    चाची भी गांड हिला हिला कर चुद रही थीं.

    इस आसन में करीब दस मिनट ऐसे ही चुदाई का खेल चलता रहा, फिर चाची बोलीं- अब मैं झड़ने वाली हूँ..
    इतना सुनते ही चाचा ने अपना लंड बाहर निकाला और बोले- चित लेट जा.. जल्दी.. मैं भी झड़ने वाला हूँ..

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    चाची झट से चित लेट गईं और अपने दोनों पैर खोल के आसमान की तरफ उठा लिए. चाचा भी जोश में थे. वो जल्दी से चाची के ऊपर चढ़ गए और धकाधक चोदने लगे. नीचे से चाची भी गांड उचकाने लगीं. दोनों तरफ जोश बढ़ता गया.. दोनों की स्पीड बढ़ गई. दोनों की सीत्कार भी तेज होती गईं. दोनों आनन्द की चरम सीमा पर पहुंच रहे थे. उनकी चुदाई की स्पीड और तेज हो गई. चाची अपनी टांगें और ऊपर उठाती चली गईं. चाचा की स्पीड भी बढ़ती गई.. और अगले ही पल दोनों के मुँह से एक लम्बी आह.. निकल गई.

    उसी बीच चाचा बोल उठे- कहां झड़ूं?
    चाची जोर जोर से हांफते हुए बोलीं- चूत के अन्दर ही झड़ा दो राजा..

    चाचा की स्पीड और तेज हो गई. चाची की गांड की उछाल भी तेज हो गई. तभी दोनों कचकचाकर एक दूसरे से लिपट गए और इधर मेरा लंड भी एक बार और पिचकारी छोड़ गया.
    दोनों एक साथ झड़ गए, चाचा का समूचा वीर्य चाची की चूत के अन्दर ही पिचकारी छोड़ते हुए निकल गया. चाची की चूत ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया. दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए.. और गहरी सांसें लेने लगे.
    थोड़ी देर यूं ही पड़े रहने के बाद दोनों एक दूसरे से अलग हो गए. चाचा का लंड और चाची की चुदी हुए चूत का सीन देखने लायक था.
    कुछ देर के बाद दोनों कपड़े पहनने लगे और मैं दबे पांव अपने बिस्तर पर चला गया.

    मेरी चाची की चुदाई की कहानी पर आपके मेल का इन्तजार रहेगा.

  • पड़ोसन की गांड उसी के ब्यूटी पार्लर में मारी

    मेरा नाम संकेत है मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा हूं, मेरे पिता का प्रॉपर्टी का काम है और हम लोग लखनऊ में रहते हैं, मेरे पिताजी का प्रॉपर्टी का काम काफी समय से है। मेरी मम्मी घर का काम संभालती हैं और मेरी बहन भी घर पर ही रहती है क्योंकि उसके कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी है, अब उसकी कॉलेज की पढ़ाई हो चुकी है तो वह घर पर ही मम्मी के साथ रहती हैं। मैं अपने कॉलेज जाता हूं और शाम को कॉलेज से वापस लौट आता हूं। मेरी बहन के लिए मेरे पापा ने एक रिश्ता भी देख लिया और वह बहुत ही खुश थे कि उसके लिए उन्होंने एक लड़का देख लिया था क्योंकि मेरे पिताजी चाहते हैं कि वह मेरी बहन की जल्दी से शादी करवा दें और उन्होंने मेरी बहन की सगाई करवा दी।



    मेरी बहन की सगाई में हमारे पड़ोस में ही एक महिला रहती हैं वही मेरी बहन को तैयार करने आई थी। उनका नाम तेजल है, वह ब्यूटी पार्लर का काम करती हैं और उनका ब्यूटी पार्लर हमारे कॉलोनी में ही है इसलिए हमने उन्हें ही बुलाया था। जब वह हमारे घर पर आई तो मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि मैं उन्हें अक्सर देखा करता था और मुझे उन्हें देखना भी बहुत अच्छा लगता था। मैं जब भी तेजल को देखता हूं तो मुझे उन्हें देखकर एक खुशी मिलती है। वह जब हमारे घर पर आई तो उस दिन मेरी उनसे बहुत बात हुई, उससे पहले मैंने उनसे कभी भी इतनी बात नहीं की थी। वह मेरी बहन को तैयार कर रही थी इसलिए मेरी उनसे बहुत बात हो रही थी। मेरा उनसे उस दिन अच्छा परिचय हो गया था। मेरे पिताजी ने उन्हें कहा कि शादी के समय भी तुम्हें ही हमारी बेटी को तैयार करना है और तुम्हे ही उसको अच्छे से तैयार करना है, वह कहने लगी की आप मुझे बता देना जब भी आना हो मैं उस दिन समय से आ जाऊंगी। अब वह यह कहते हुए चली गई और मेरे पापा ने उन्हें पैसे दे दिए। मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई में ही लगा हुआ था क्योंकि हमारे एग्जाम नजदीक आने वाले थे इसलिए मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था और उस वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ यही चल रहा था कि मैं किसी तरीके से पास हो जाऊं क्योंकि मैंने बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं की थी और मेरे पास नोट्स भी नहीं थे इसलिए मैं अपने दोस्तों के पास जाकर नोट्स ले रहा था, मैं उनसे ही मदद ले रहा था।



    मैंने अपने कॉलेज से कई दिन बंक भी मारे थे इसीलिए मुझे मेरे टीचर भी पसंद नहीं करते थे लेकिन मैंने अपने दोस्तों से नोट्स तैयार करवा लिया और मैं पढ़ाई करने लगा। मेरे पेपरों के दौरान मैं घर से बाहर कहीं भी नहीं निकला क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मेरे पेपर में कम नंबर आए इसीलिए मैंने बहुत ज्यादा तैयारी की। जब मैंने तैयारी कर ली तो मेरे पिताजी मुझे कहने लगे कि तुम बहुत ही अच्छे से आजकल पढ़ाई कर रहे हो, मैंने अपने पिताजी को बताया कि मेरे एग्जाम नजदीक है इसीलिए मैं पढ़ाई कर रहा हूं। वह बहुत ही खुश है और कहने लगे यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुम पढ़ाई कर रहे हो, नहीं तो तुम इधर उधर ही घूमते रहते हो। मैंने अपनी बहन से उस वक्त बहुत मदद ली और उसने भी मेरी बहुत मदद की क्योंकि मैंने बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं की थी इसी वजह से मैंने उससे मदद मांगी तो उसने मुझे कहा कि मैं तुम्हारी हेल्प कर देती हूं। उसने मेरी नोट्स बनाने में मेरी बहुत मदद की थी। अब मेरे एग्जाम हो चुके थे और मैं घर पर ही था। हमारे कॉलेज की छुट्टियां थी और मैं अब घर पर ही रहता था इसलिए मैं शाम को हमेशा अपने छत पर चला जाता था या फिर अपने दोस्तों के पास चले जाता। जब मैं अपने दोस्त के पास जाता तो उस वक्त मैं तेजल के ब्यूटी पार्लर से होकर ही गुजरता था। वह जब भी मुझे देखती तो मैं उसे देखकर खुश हो जाता था और मैं उसे कभी कबार बात कर लिया करता था लेकिन वह मुझसे ज्यादा बात नहीं करती थी। एक दिन मेरे दोस्त की बहन की भी शादी थी तो मैं तेजल के पास चला गया और उससे पूछने लगा कि आप मुझे अपना रेट कार्ड दे दीजिए मैं अपने दोस्त से इस बारे में बात कर लूंगा और आपको भी वहां पर बुकिंग मिल जाएगी।



    उन्होंने मुझे कहा कि तुम मुझे अपने साथ ही उनके घर पर ले चलना, मैं उन्हें सारी चीज समझा दूंगी। मैंने कहा ठीक है आप मेरे साथ ही उनके घर पर चल लेना। मैं उन्हें अपने साथ ही अपने दोस्त के घर पर ले गया, जब मैं उन्हें अपने दोस्त के घर ले गया तो मैंने अपने दोस्त के पिताजी से तेजल की मुलाकात करवा दी। वह उसे पूछने लगे कि हमारी बेटी की शादी कुछ समय बाद है तो आप यदि उसे तैयार करती है तो आप कितना चार्ज करेंगे, उसने बता दिया कि मैं आपको सबसे कम रेट लगा दूंगी क्योंकि मैं संकेत के घर के पास ही रहती हूं इसलिए आप उसकी बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए। अब हम लोग वहां से वापस आ गए और मैंने तेजल को शादी की बुकिंग भी दिलवा दी थी, वह बहुत खुश थी और मुझे कहने लगी कि तुमने मुझे शादी की बुकिंग दिलवाई है तो मुझे उसके बदले तुम्हे कुछ पैसे देने चाहिए। मैंने उसे कहा कि मुझे उसके बदले कुछ भी नहीं चाहिए। मेरी बात अब तेजल से होने लगी थी और जब भी मैं उसके ब्यूटी पार्लर के सामने से गुजरता था तो वह मुझे बुला लिया करती और मुझसे बात करती थी। मुझे भी तेजल से बात करना बहुत अच्छा लगता था क्योंकि मैं उसे पसंद करता था परंतु उसकी शादी हो चुकी है, फिर भी ना जाने मेरे दिल में उसके लिए क्यों एक अलग तरीके की फीलिंग थी। एक दिन वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुम्हारे उस दोस्त के पिता जी का फोन आया था और वह कह रहे थे कि उनकी लड़की की शादी अगले महीने है। मैंने उसे कहा कि हां उनकी शादी अगले महीने ही है।



    उसने मुझे अपने ब्यूटी पार्लर में बुला लिया और मैं उससे बैठकर बातें कर रहा था वह बहुत खुश थी क्योंकि मैंने उसे बुकिंग दिलवाई थी। वह मेरे बगल में ही बैठी हुई थी और मेरी आंखों के सामने उसके स्तन दिखाई दे रहे थे मैंने जब अपने हाथ उसके चूचो पर लगाया तो वह समझ चुकी थी। मैंने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो तेजल ने अपने हाथों में मेरे लंड को ले लिया और उसे हिलाना शुरू कर दिया। हिलाते हिलाते उसने अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया और बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूसने लगी काफी देर तक उसने मेरे लंड को चूसा जिससे कि मेरा पानी भी निकलने लगा। मैंने उसकी सलवार को नचे उतार दिया और उसकी गांड को चाटने लगा। मैंने बहुत देर तक उसकी गांड को चाटा और वह भी पूरे मूड में आ गई मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था क्योंकि उसकी गांड बहुत ही बड़ी थी और मैं जब उसे अपने हाथ से पकड़ता तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था मैंने उसकी गांड पर अपने दांत के निशान भी मार दिए। वह मुझे कहने लगी कि मैं तुम्हें एक चीज देती हूं तुम उसे अपने लंड पर लगा लो ताकि तुम्हें मेरी गांड मारने में मजा आए। उसने मुझे एक लिक्विड दिया मैंने उसे अपने लंड पर अच्छे से लगा लिया और मैंने थोड़ा बहुत उसकी गांड के ऊपर भी लगा दिया। जब मैंने अपना लंड तेजल की गांड के अंदर उतरा तो वह चिल्ला उठी मेरा पूरा लंड तेजल की गांड के अंदर जा चुका था। वह पूरे मूड में आ गई और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था जब मैं तेजल की गांड मार रहा था। मुझे इतना मजा आता कि वह भी अपनी गांड को मुझसे टकराने लगी और मुझे कह रही थी तुम तो मेरी गांड बहुत ही अच्छे से मार रहे हो। मैंने उसे कहा कि मैं तुम्हें और भी बुकिंग दिलवा दूंगा और उसके बदले मैं तुम्हारी गांड मारूंगा। वह बहुत खुश हो रही थी और कह रही थी तुम मेरी गांड फ्री में ही मार लो मुझे तुम कोई बुकिंग भी मत दिलवाना क्योंकि उसे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और वह अपनी गांड को मुझसे टकराने पर लगी हुई थी। मैंने भी उसे बड़ी तेजी से झटके देना शुरू कर दिया और इतनी तेज गति से मैं उसे धक्के मार रहा था कि अब उससे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपने वीर्य को तेजल की गांड के अंदर ही डाल दिया। वह बहुत खुश हो गई उसने मुझे अपने गले लगा लिया उसके बाद से मैं अक्सर तेजल के ब्यूटी पार्लर में जाता हूं।